<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
     xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
     xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
     xmlns:admin="http://webns.net/mvcb/"
     xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
     xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
     xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
    <title>State Today News &amp; : राष्ट्रीय समाचार</title>
    <link>https://statetoday.in/rss/category/National-news</link>
    <description>State Today News &amp; : राष्ट्रीय समाचार</description>
    <dc:language>en</dc:language>
    <dc:creator></dc:creator>
    <dc:rights>Copyright 2023 Varient &amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
    <item>
        <title>महाशिवरात्रि पर मंदिर दर्शन के बाद गौमूत्र छिड़कने से विवाद, अब्दुल सत्तार को लेकर गरमाई राजनीति</title>
        <link>https://statetoday.in/महाशिवरात्रि-पर-मंदिर-दर्शन-के-बाद-गौमूत्र-छिड़कने-से-विवाद-अब्दुल-सत्तार-को-लेकर-गरमाई-राजनीति</link>
        <guid>https://statetoday.in/महाशिवरात्रि-पर-मंदिर-दर्शन-के-बाद-गौमूत्र-छिड़कने-से-विवाद-अब्दुल-सत्तार-को-लेकर-गरमाई-राजनीति</guid>
        <description><![CDATA[ Maha Shivratri: महाराष्ट्र  की राजनीतिक इन दिनों टीपू सुल्तान (Tipu Sultan) को लेकर गर्म है। इसी बीच एक और ऐसी खबर निकलकर सामने आई है, जो और भी सियासी बखेड़ा खड़ा सकता है। दरअसल छत्रपति संभाजीनगर में महाशिवरात्रि पर शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के नेता और पूर्व मुस्लिम मंत्री अब्दुल सत्तार (abdul sattar) के मंदिर पहुंचने के बाद गौमूत्र से शुद्धिकरण किया गया। अब्दुल सत्तार के मंदिर दर्शन के बाद कुछ युवकों ने मंदिर को अशुद्ध बताकर गौमूत्र छिड़का। घटना के बाद सियासी हंगामा मच गया है। घटना 15 फरवरी की है।घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही। हालांकि किसी बड़े विवाद या झड़प की सूचना नहीं है। पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।वहीं दूसरी तरफ अब्दुल सत्तार के मंदिर में जाने का विरोध कर रहे युवकों का कहना है कि अब्दुल सत्तार नाश्ते में मांसाहारी भोजन करते हैं और बिना उसके घर से बाहर नहीं निकलते। उनका दावा है कि महाशिवरात्रि जैसे पवित्र दिन ऐसे व्यक्ति का प्रवेश स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने मंदिर में गौमूत्र छिड़का है।कौन हैं अब्दुल सत्तार?अब्दुल सत्तार का पूरा नाम अब्दुल सत्तार अब्दुल नबी है। वे छत्रपती संभाजीनगर जिले के सिल्लोड विधानसभा क्षेत्र से 3 बार चुने गए विधायक रह चुके हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1965 को सिल्लोड में हुआ था। उन्होंने यशवंतराव चव्हाण कॉलेज से बी.ए. किया है। उन्होंने सिल्लोड में छोटा साइकिल शॉप से काम शुरू किया था। उनके परिवार की बात करें तो पत्नी नफीसा बेगम, 2 बेटे (एक बेटा समीर अब्दुल सत्तार) और 2 बेटियां है।हिंदुत्व’ और शिवसेना की विचारधारा का समर्थन करते हैउन्होंने अपना राजनीतिक सफर 1984 में ग्राम पंचायत से शुरु किया, 1994 में सिल्लोड के नगराध्यक्ष (मेयर) बने। वे पहले कांग्रेस में हुआ करते थे। 2019 में कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हो गए। उद्धव ठाकरे सरकार (2019-2022) में राज्यमंत्री रहे। इसके बाद वे 2022 में एकनाथ शिंदे के साथ बगावत में शामिल हुए (शिवसेना शिंदे गुट)। 2023-2024 तक शिंदे-फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे, इस दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक विकास और औकाफ, मार्केटिंग, कृषि आदि विभाग संभाला। फिलहाल वे शिंदे गुट की शिवसेना पार्टी के नेता हैं। हालांकि वे एक मुस्लिम नेता हैं लेकिन ‘हिंदुत्व’ और शिवसेना की विचारधारा का समर्थन करते हैं। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf940a00.jpg" length="74752" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>महाशिवरात्रि, पर, मंदिर, दर्शन, के, बाद, गौमूत्र, छिड़कने, से, विवाद, अब्दुल, सत्तार, को, लेकर, गरमाई, राजनीति</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>दिल्ली सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 72 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले</title>
        <link>https://statetoday.in/दिल्ली-सरकार-का-बड़ा-प्रशासनिक-फेरबदल-72-वरिष्ठ-अधिकारियों-के-तबादले</link>
        <guid>https://statetoday.in/दिल्ली-सरकार-का-बड़ा-प्रशासनिक-फेरबदल-72-वरिष्ठ-अधिकारियों-के-तबादले</guid>
        <description><![CDATA[ दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए 72 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, इस सूची में एजीएमयूटी कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार द्वारा किए गए इस व्यापक बदलाव के तहत कई अधिकारियों को नए विभागों में तैनात किया गया है, जबकि कुछ को उनके मौजूदा पद के साथ अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। माना जा रहा है कि प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।36 IAS और 36 दानिक्स अफसर हुए इधर-उधरआदेश के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम एवं संघ राज्य क्षेत्र (एजीएमयूटी) कैडर के 36 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं या उनका विभिन्न विभागों में तबादला किया गया है। इस व्यापक फेरबदल में 36 दिल्ली, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह सिविल सेवा (दानिक्स) अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। कई अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि कुछ को नए विभागों में तैनात किया गया है।संतोष डी. वैद्य बनाए गए प्रधान सचिव (गृह)1998 बैच के आईएएस अधिकारी संतोष डी. वैद्य को प्रधान सचिव (गृह) नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वे वित्त, योजना और उद्योग विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (समाज कल्याण) का दायित्व संभाल रहे 1992 बैच के आईएएस अधिकारी बिपुल पाठक को अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।वहीं, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और 2006 बैच के आईएएस अधिकारी रूपेश कुमार ठाकुर को सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) नियुक्त किया गया है। वे 2002 बैच के आईएएस अधिकारी निखिल कुमार का स्थान लेंगे, जिन्हें आयुक्त (व्यापार एवं कर) बनाया गया है।संजीव आहूजा शिक्षा सचिव नियुक्तहाल ही में दिल्ली सरकार में शामिल हुए 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी संजीव आहूजा को सचिव (शिक्षा) नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वे उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वहीं, 2004 बैच के आईएएस अधिकारी पांडुरंग पोले, जो अब तक शिक्षा सचिव के पद पर तैनात थे, का तबादला सामान्य प्रशासन विभाग में कर दिया गया है। उन्हें श्रम आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf981e66.jpg" length="62443" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, सरकार, का, बड़ा, प्रशासनिक, फेरबदल, वरिष्ठ, अधिकारियों, के, तबादले</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>“एपस्टीन फाइल्स विवाद: हरदीप पुरी का दावा, आरोप बेबुनियाद और पेशेवर मुलाकातें थीं</title>
        <link>https://statetoday.in/एपस्टीन-फाइल्स-विवाद-हरदीप-पुरी-का-दावा-आरोप-बेबुनियाद-और-पेशेवर-मुलाकातें-थीं</link>
        <guid>https://statetoday.in/एपस्टीन-फाइल्स-विवाद-हरदीप-पुरी-का-दावा-आरोप-बेबुनियाद-और-पेशेवर-मुलाकातें-थीं</guid>
        <description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने आप को मूर्ख साबित कर लिया है। पुरी ने NDTV को दिए इंटरव्यू में एपस्टीन फाइल्स में अपना नाम आने और विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।हरदीप पुरी ने दावा किया कि जब वे काम से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी फाइनेंसर और बाल यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से मिले थे तो उन्हें असहजता महसूस हुई थी। उन्होंने कहा- मैंने एपस्टीन से मिलने की इच्छा नहीं जताई थी। ये मुलाकातें अरेंज की गई थींउन्होंने आगे कहा- दो मुलाकातों से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मैं इस मामले में बेदाग हूं। उस समय तो मैं सरकार का हिस्सा भी नहीं था। इसलिए राहुल गांधी का यह कहना कि एपस्टीन फाइल्स की वजह से प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में सरेंडर कर दिया, बिल्कुल गलत है।कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद में दावा किया था कि अमेरिका में जारी किए गए एपस्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी का नाम है। राहुल के आरोपों पर पुरी ने बुधवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पहली बार माना था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे।पुरी ने कहा- मुलाकात के समय एपस्टीन को नहीं जानता थापुरी से इंटरव्यू में जब पूछा गया कि क्या आपको आपराधिक आचरण की जानकारी थी तो पुरी ने कहा- ‘मैं नहीं जानता था कि वह कौन था। मैं पहली बार एपस्टीन से एक मीटिंग में मिला था। मुझे उसके बैकग्राउंड के बारे में पता नहीं थपुरी ने कहा- पहली बार मुलाकात के दौरान मुझे नहीं पता था कि एपस्टीन कौन हैं। हमने उनके बारे में गूगल पर सर्च किया। फिर हमने आपस में भी चर्चा की कि हमें उनसे मिलना चाहिए या नहीं? पुरी ने एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया।पुरी बोले- एपस्टीन को मीटिंग का इनविटेशन नहीं थापुरी ने कहा- राजनीति में या सार्वजनिक जीवन में, अगर मैं सरकारी अधिकारी होता, तो मैं किसी को मैसेज भेजकर पूछता, ‘क्या मुझे इस व्यक्ति से मिलना चाहिए?’ लेकिन उस समय मैं IPI के साथ काम कर रहा था।पुरी ने कहा- हम दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे थे। हमने एपस्टीन को वहां इनवाइट नहीं किया था। IPI के डेलिगेशन के हिस्से के रूप में एपस्टीन से तीन या चार बार मुलाकात की थी। पुरी ने बताया कि एपस्टीन IPI के सदस्य नहीं थे।एपस्टीन को भेजे ईमेल पर भी केंद्रीय मंत्री ने जवाब दियापुरी ने 2014 और 2015 में एपस्टीन से ईमेल पर बातचीत की थी। इनमें से एक ईमेल में उन्होंने एपस्टीन से ‘एग्जॉटिक आइलैंड’ का जिक्र किया था। पुरी ने लिखा था- प्लीज मुझे बताएं कि आप अपने एग्जॉटिक आइलैंड से कब वापस आ रहे हैं। मैं आपसे मिलने आना चाहूंगा, साथ ही आपको भारत में रुचि जगाने के लिए कुछ किताबें भी देना चाहूंगा।दूसरे ईमेल में एपस्टीन को जवाब देते हुए लिखा था- ‘हैव फन’। पुरी से जब इंटरव्यू में इन ईमेल पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- मैं यह मुहावरा सबके साथ इस्तेमाल करता हूं। मेरी इन बातों का कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf9c969a.jpg" length="72467" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>“एपस्टीन, फाइल्स, विवाद:, हरदीप, पुरी, का, दावा, आरोप, बेबुनियाद, और, पेशेवर, मुलाकातें, थीं</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>एपस्टीन फाइल्स पर बयान से बवाल: राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई पर सरकार बैकफुट?</title>
        <link>https://statetoday.in/एपस्टीन-फाइल्स-पर-बयान-से-बवाल-राहुल-गांधी-के-खिलाफ-कार्रवाई-पर-सरकार-बैकफुट</link>
        <guid>https://statetoday.in/एपस्टीन-फाइल्स-पर-बयान-से-बवाल-राहुल-गांधी-के-खिलाफ-कार्रवाई-पर-सरकार-बैकफुट</guid>
        <description><![CDATA[ पिछले कई दिनों से संसद का बजट सत्र चल रहा है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक सत्र के पहले दिन से जारी है. सबसे पहले राहुल गाँधी ने पूर्व सेना प्रमुख की किताब जिसमें चीन का जिक्र है उसे लेकर चर्चा की मांग कर रहे थे. वहीं सरकार इसे देश की आंतरिक सुरक्षा की बात कहते हुए चर्चा करने से बचती नजर आ रही है. अब राहुल ने लोकसभा में बजट पर बोलते हुए एपस्टीन फाइल्स का जिक्र कर दिया. राहुल ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम लेकर भी आरोप लगाए थे. जिसके बाद सरकार ने इसे लेकर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था. हालाँकि अब जानकारी मिली है कि, सरकार ने अपना ये प्लान ठन्डे बास्ते में दाल दिया है. सरकार के इस फैसले के पीछे गतिरोध के बाद मशक्कत से पटरी पर लौटी लोकसभा में नया गतिरोध शुरू करने से बचने की कवायद भी वजह बताई जा रही है.प्रस्ताव आता तो राहुल की जा सकती थी सदस्यताबात अगर संसद के नियमों की करें तो उसके अनुसार हर सांसद के पास कुछ विशेषाधिकार होते हैं जिसमें भाषण देने का अधिकार,सिविल मामलों में गिरफ्तारी से बचाव जैसे अधिकार हैं. मगर सदन के अंदर कुछ ऐसे मामले भी हैं जैसे कि आपने किसी पर कोई आरोप लगाया तो आपको उसे सत्यापित करना होगा,उसके लिए आपको कुछ सबूत देने होंगे. आपको बताना होगा कि मैंने ये बातें यहां से कोट की हैं और संबंधित दस्तावेज की कॉपी आपको सदन में पेश करना होगा. हम ये बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ताजा मामला राहुल गांधी से संबंधित है. जिसमें राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल से संबंधित कुछ जानकारी सदन में अपने भाषण के दौरान कही हैं. अब सत्ता पक्ष का कहना है कि राहुल गांधी इसे सत्यापित करें वरना उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है.बता दें अगर, यदि राहुल गांधी के खिलाफ यदि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव मंजूर हो जाता और सदन चाहे तो राहुल गांधी को सदन से निष्कासित किया जा सकता था. फिर ऐसे हालात में उनकी सदस्यता भी जा सकती थी. इतिहास गवाह है कि 1978 में इंदिरा गांधी को इमरजेंसी के दौरान अधिकारियों के काम में बाधा डालने पर संसद में तब के गृह मंत्री चरण सिंह के प्रस्ताव पर इंदिरा गांधी को सदन से निष्कासित किया गया था और उन्हें थोड़े दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा था.इसी तरह का एक मामला राज्यसभा में भी हुआ था जब सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ 1976 में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आया था. उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया गया था और उनकी सदस्यता चली गई थी.अब सबसे बड़ा सवाल है कि इतिहास एक बार फिर एक बार दोहराया,क्या सरकार राहुल गांधी को निष्कासित करने का जोखिम ले सकती हैं.इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड (संशोधन) बिल लोकसभा में पेशइंडस्ट्रियल रिलेशन कोड (संशोधन) बिल लोकसभा में पेश हो गया है. श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में यह बिल पेश कर दिया है. मनसुख मंडाविया ने ये बिल पेश करते हुए कहा कि छोटा सा संशोधन लेकर आए हैं. सदन इसे विचार कर पारित करे. विपक्ष की ओर से के सुरेश ने इस बिल पर बोलते हुए कहा कि यह श्रमिकों के हित में नहीं है.पीएम मोदी ने की लोकसभा में वित्त मंत्री के भाषण की तारीफवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक दिन पहले लोकसभा में बजट पर हुई चर्चा का जवाब दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है. पीएम मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण की तारीफ की है. उन्होंने कहा है कि लोकसभा में अपने भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये बताया कि इस वर्ष का बजट हमारे देश के आर्थिक परिवर्तन में किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. वित्त मंत्री ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर जोर दिया और एमएसएमई को समर्थन, कौशल विकास, नई पीढ़ी के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और शिक्षा सहित कई अन्य क्षेत्रों में सुधार के प्रयासों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला.राहुल गांधी के खिलाफ निशिकांत दुबे ने पेश किया प्रस्तावउधर, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि मैंने आज लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक मोशन पेश किया है कि कैसे वे सोरोस जैसी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं. मैंने जो मोशन पेश किया है, उसमें मैंने कहा है कि इस पर चर्चा हो और राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कर दी जाए और उन पर ज़िंदगी भर के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जाए.बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाने का कोई प्रपोज़ल नहीं है, लेकिन उन्होंने कन्फर्म किया कि उन्होंने राहुल गांधी को पार्लियामेंट से सस्पेंड करने के लिए एक ज़रूरी मोशन पेश किया है. ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bfa11bc0.jpg" length="82608" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:49 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>एपस्टीन, फाइल्स, पर, बयान, से, बवाल:, राहुल, गांधी, के, खिलाफ, कार्रवाई, पर, सरकार, बैकफुट</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>16 फरवरी: चांदी 2,949 रुपए सस्ती, सोना 1,315 रुपए महंगा</title>
        <link>https://statetoday.in/16-फरवरी-चांदी-2949-रुपए-सस्ती-सोना-1315-रुपए-महंगा</link>
        <guid>https://statetoday.in/16-फरवरी-चांदी-2949-रुपए-सस्ती-सोना-1315-रुपए-महंगा</guid>
        <description><![CDATA[ चांदी के दाम में आज 16 फरवरी को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी की कीमत 2,949 रुपए गिरकर 2,39,484 रुपए किलो पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को चांदी की कीमत 2,42,433 रुपए किलो थी।वहीं, आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,315 रुपए बढ़कर 1,54,080 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले शुक्रवार को ये 1,52,765 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। हालांकि, पिछले तीन कारोबारी दिनों में चांदी ₹26,965 और सोना 3,242 रुपए सस्ता हुआ है।सर्राफा बाजार में 29 जनवरी को सोने ने 1,76,121 रुपए और चांदी ने 3,85,933 रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था। तब से अब तक सोना 22,041 रुपए और चांदी 1,46,449 सस्ती हो चुकी है।अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग क्यों होते हैं?IBJA की सोने की कीमतों में 3% GST, मेकिंग चार्ज, ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होता। इसलिए शहरों के रेट्स इससे अलग होते हैं। इन रेट्स का इस्तेमाल RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने के लिए करता है। कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं।सस्ते दामों पर खरीदारी कर रहे लोगपिछले तीन कारोबारी सत्रों में सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई है। इस दौरान सोना करीब 15% तक सस्ता हो गया था। अब कीमतें स्थिर होते ही निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी शुरू कर दी है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अभी सोने-चांदी में एक मुश्त पैसा लगाने से बचना चाहिए। इसकी जगह धीरे-धीरे निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होगा।सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf848e26.jpg" length="67335" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>फरवरी:, चांदी, 2, 949, रुपए, सस्ती, सोना, 1, 315, रुपए, महंगा</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>महाशिवरात्रि कार्यक्रम में राजनाथ सिंह का बयान, सेना को बताया शिव और रुद्र की शक्ति का प्रतीक</title>
        <link>https://statetoday.in/महाशिवरात्रि-कार्यक्रम-में-राजनाथ-सिंह-का-बयान-सेना-को-बताया-शिव-और-रुद्र-की-शक्ति-का-प्रतीक</link>
        <guid>https://statetoday.in/महाशिवरात्रि-कार्यक्रम-में-राजनाथ-सिंह-का-बयान-सेना-को-बताया-शिव-और-रुद्र-की-शक्ति-का-प्रतीक</guid>
        <description><![CDATA[ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना भगवान शिव से प्रेरणा लेती है। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार भगवान शिव रक्षा और विनाश दोनों के प्रतीक हैं, उसी प्रकार हमारी सशस्त्र सेनाएं आज निर्भीकता और धैर्य दोनों का प्रतीक हैं।” रविवार शाम को वे कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा, “एक तरफ तो वे संकट के समय शिव की भावना से प्रेरित होकर मानवीय सहायता प्रदान करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर रुद्र की शक्ति से ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान चलाते हैं। हमारे सैनिकों में जो भावना है, वह हमारी संस्कृति से, भगवान शिव की प्रेरणा से आती है।”“डर पर आधारित समाज कभी भी दीर्घकाल में वास्तव में सुरक्षित नहीं हो सकता। केवल एक निडर समाज ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। यह निडरता शारीरिक शक्ति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सार से आती है।” उन्होंने आगे कहा।चंद्रयान और आदित्य-L1 का किया जिक्ररक्षा मंत्री ने आगे कहा कि चंद्रयान और आदित्य-L1 जैसे भारत के स्पेस मिशन सिर्फ टेक्नोलॉजिकल अचीवमेंट नहीं हैं, बल्कि यह एक पुरानी साइंटिफिक विरासत का मॉडर्न एक्सप्रेशन है। राजनाथ सिंह रविवार को ईशा फाउंडेशन के महाशिवरात्रि कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के साथ कुछ लोगों को सम्मानित भी किया।ऑपरेशन सिंदूर के लिए सैनिकों को सम्मानित कियारक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के साथ ईशा फाउंडेशन की ओर से सम्मानित लोगों को भव्य भारत भूषण अवॉर्ड मेडल और सर्टिफिकेट दिए। ये अवॉर्ड वेस्टर्न एयर कमांड के एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा और वेस्टर्न नेवल कमांड के एडमिरल राहुल विकास खोकले को ऑपरेशन सिंदूर के लिए दिए गए। दूसरे अवॉर्ड पाने वालों में आर्टिस्ट डॉ. एन. राजन, डांसर अलमेल वल्ली, रॉकेट साइंटिस्ट डॉ. नांबी नारायणन, ISRO के पूर्व चेयरमैन ए.एस. किरण कुमार, एकेडमिशियन विक्रम संपत और बैडमिंटन प्लेयर साइना नेहवाल शामिल थे। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf881814.jpg" length="59501" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>महाशिवरात्रि, कार्यक्रम, में, राजनाथ, सिंह, का, बयान, सेना, को, बताया, शिव, और, रुद्र, की, शक्ति, का, प्रतीक</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम की रिहाई अर्जी खारिज, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख</title>
        <link>https://statetoday.in/मुंबई-ब्लास्ट-केस-अबू-सलेम-की-रिहाई-अर्जी-खारिज-सुप्रीम-कोर्ट-का-सख्त-रुख</link>
        <guid>https://statetoday.in/मुंबई-ब्लास्ट-केस-अबू-सलेम-की-रिहाई-अर्जी-खारिज-सुप्रीम-कोर्ट-का-सख्त-रुख</guid>
        <description><![CDATA[ 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को देश की शीर्ष अदालत से बड़ा झटका लगा है. 25 साल की कैद पूरी करने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सलेम की रिहाई याचिका खारिज कर दी है. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाया. दरअसल, सलेम के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल ने 25 साल की सजा पूरी कर ली है, तो उसको रिहा कर दिया जाए.
वकील ने बताया कि सलेम को 11 नवंबर 2005 को हिरासत में लिया गया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि क्या वकील छूट (रिमिशन) को जोड़कर 25 साल की गणना कर रहे हैं. गौरतलब है कि अबू सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था. भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण समझौते के तहत सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता और न ही उसे 25 साल से ज्यादा की जेल की सजा हो सकती है.पुर्तगाल ने क्यों समझौता कर भारत को सौपा था अबू सलेम
अबू सलेम को 2002 में पुर्तगाल में फर्जी पासपोर्ट के मामले में गिरफ्तार किया गया था और भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की. जब पुर्तगाल ने अबू सलेम को भारत को सौंपा, तो उसने मांग रखी थी कि भारत अबू सलेम को फांसी की सजा नहीं देगा और न ही 25 साल से ज्यादा की जेल.
भारत के आश्वासन के बाद पुर्तगाल की अदालत ने फरवरी 2004 में प्रत्यर्पण को मंजूरी दी. 11 नवंबर 2005 को अबू सलेम को पुर्तगाल से भारत लाया गया. यह आश्वासन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि पुर्तगाल में मौत की सजा नहीं है और कैद की अधिकतम अवधि सीमित होती है, इसलिए पुर्तगाल ने भारत से इसी तरह की शर्तों पर ही प्रत्यर्पण मंजूर दी थी.1993 मुंबई बम धमाके
1993 के मुंबई बम धमाके भारत के इतिहास की सबसे बड़ी और भयानक सीरियल बम ब्लास्ट घटनाओं में से एक हैं. यह एक सुनियोजित आतंकवादी हमला था जो 12 मार्च 1993 को दोपहर लगभग 1:30 से 3:40 बजे के बीच हुआ. इस दिन मुंबई में 12-13 जगहों पर एक के बाद एक आरडीएक्स से भरे कार बम विस्फोट हुए, जिनमें मुख्य रूप से शहर के व्यस्त और अहम इलाके निशाना बनाए गए थे. जिसमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, एयर इंडिया बिल्डिंग आदि शामिल हैं.
 ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf8b9b03.jpg" length="80346" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>मुंबई, ब्लास्ट, केस:, अबू, सलेम, की, रिहाई, अर्जी, खारिज, सुप्रीम, कोर्ट, का, सख्त, रुख</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>राजधानी में नाबालिगों का आतंक, NCRB आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता</title>
        <link>https://statetoday.in/राजधानी-में-नाबालिगों-का-आतंक-ncrb-आंकड़ों-ने-बढ़ाई-चिंता</link>
        <guid>https://statetoday.in/राजधानी-में-नाबालिगों-का-आतंक-ncrb-आंकड़ों-ने-बढ़ाई-चिंता</guid>
        <description><![CDATA[ दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराध तेजी से एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। खासकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 12 से 17 वर्ष के किशोर जघन्य वारदातों में अधिक संख्या में शामिल पाए जा रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। पुलिस की सख्ती और लगातार कार्रवाई के बावजूद अपराध का ग्राफ कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में नाबालिग संगठित गैंगों के प्रभाव में आकर चोरी, लूट, हिंसा और नशे से जुड़े अपराधों में शामिल हो रहे हैं।बचपन से अपराध तक: क्यों भटक रही है नाबालिगों की नई पीढ़ी?
दिल्ली की निम्न आय वर्ग की बस्तियों में कभी गिल्ली-डंडा, कंचे, लट्टू और क्रिकेट खेलने वाले बच्चों की आवाज गूंजती थी, लेकिन अब कई इलाकों में वही गलियां जघन्य अपराधों की खबरों और पुलिस सायरन से पहचानी जाने लगी हैं। कम उम्र में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति समाज और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता बनती जा रही है।
जमीनी पड़ताल में सामने आया है कि नाबालिग अपराध की जड़ें केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि परिवार, परिवेश और सामाजिक उपेक्षा से गहराई से जुड़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जुवेनाइल अपराध से जुड़े करीब 75% मामले झुग्गी-झोपड़ी और पुनर्वास कॉलोनियों से आते हैं, जबकि लगभग 22% मामले निम्न मध्यम वर्ग और सिर्फ 3% मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े पाए गए हैं।मुख कारण जो सामने आ
 
1. परिवारिक अस्थिरता और निगरानी की कमी
 
गरीबी, माता-पिता की लंबी कार्य अवधि, घरेलू हिंसा या टूटे परिवारों के कारण बच्चों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा पाता।
 
2. शिक्षा से दूरी
 
स्कूल छोड़ने की बढ़ती दर और पढ़ाई में रुचि की कमी बच्चों को गलत संगत की ओर धकेलती है।
 
3. गलत संगत और गैंग संस्कृति
 
कई किशोर बड़े अपराधियों या स्थानीय गैंग के प्रभाव में आकर जल्दी पैसा और दबदबा पाने की चाह में अपराध की राह पकड़ लेते हैं।
 
4. नशे और डिजिटल प्रभाव
 
नशे की आसान उपलब्धता और हिंसक कंटेंट का प्रभाव भी व्यवहार को प्रभावित कर रहा है।
 
5. सामाजिक उपेक्षा
 
खेल, कौशल विकास, काउंसलिंग और सकारात्मक गतिविधियों की कमी से बच्चों की ऊर्जा गलत दिशा में चली जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक ढांचे की कहानी हैं जहां बचपन धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। उनका मानना है कि समाधान केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि शिक्षा, परिवारिक समर्थन, सामुदायिक कार्यक्रम और पुनर्वास आधारित नीति से ही संभव है।लगातार वारदातों से बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
दिल्ली में नाबालिगों द्वारा लगातार अंजाम दी जा रही वारदातों ने सुरक्षा एजेंसियों और समाज दोनों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कम उम्र में अपराध की ओर झुकाव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है। बार-बार सामने आ रहे मामलों से स्पष्ट है कि कई किशोर एक बार अपराध में शामिल होने के बाद लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे पुनर्वास की चुनौती और कठिन हो जाती है।
 
कुछ प्रमुख प्रवृत्तियां जो सामने आईं
 
छोटी उम्र में गंभीर अपराध -लूट, चाकूबाजी, हत्या के प्रयास जैसे मामलों में किशोरों की संलिप्तता।
 
गैंग का प्रभाव- स्थानीय गिरोहों में शामिल होकर बार-बार अपराध करना।
 
नशे की लत- नशे की जरूरत पूरी करने के लिए अपराध की राह अपनाना।
 
कानूनी डर का अभाव- जुवेनाइल कानून के कारण सख्त सजा का डर कम होना।
 
मनोवैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, स्कूल, समुदाय और सरकार सभी को मिलकर काम करना होगा
दिल्ली में नाबालिग अपराधियों द्वारा की जा रही हिंसक वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फरवरी 2026 के पहले हफ्तों में राजधानी में कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता 
नरेला इंडस्ट्रियल एरिया के बवाना जेजे कॉलोनी में 17 वर्षीय नाबालिग को चाकू से गोद कर मार दिया गया। इस मामले में कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से चार जुवेनाइल थे।
रोहिणी के विजय विहार इलाके में दो दोस्तों ने नाबालिग को टोपी लेने के विरोध पर चाकू मार दिया। पीड़ित दो दिन बाद गंभीर हालत में दम तोड़ गया।
बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में 25 दिन पहले हुए झगड़े के बाद 15 वर्षीय छात्र की हत्या चार नाबालिगों ने सरकारी स्कूल के सामने की।
तेजी से बढ़ रहा गंभीर जुर्म करने का भी ग्राफ
दिल्ली पुलिस और एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि नाबालिग अपराधियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2024 की तुलना में 2025 में कई गंभीर अपराधों में किशोरों की भागीदारी अधिक रही। हत्या: 2025 में 17 और नाबालिग शामिल रहे। जानलेवा हमले: 123 किशोरों की भागीदारी दर्ज की गई। डकैती: आठ और नाबालिग पकड़े गए। लूट: 109 अधिक लड़के शामिल। रेप: 2024 की तुलना में SO नाबालिग ज्यादा लिप्त पाए गए। साल 2024 में दिल्ली में सभी तरह के अपराधों में शामिल नाबालिगों की संख्या 3,270 थी, जो 2025 में बढ़कर 3,833 तक पहुंच गई। एनसीआरबी के अनुसार, राजधानी में 2023 में 3,098 नाबालिग अपराधियों को पकड़ा गया था। देशभर में नाबालिग अपराधियों के मामले में दिल्ली की स्थिति गंभीर है, हालांकि महाराष्ट्र (3,970) और मध्य प्रदेश (3,619) में इससे भी अधिक किशोर अपराधियों का आंकड़ा सामने आया है। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf900bff.jpg" length="75773" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:48 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>राजधानी, में, नाबालिगों, का, आतंक, NCRB, आंकड़ों, ने, बढ़ाई, चिंता</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>CBSE 12वीं बोर्ड 2026: सप्लीमेंट्री एग्जाम में नियमों में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ एक विषय में सुधार संभव</title>
        <link>https://statetoday.in/cbse-12वीं-बोर्ड-2026-सप्लीमेंट्री-एग्जाम-में-नियमों-में-बड़ा-बदलाव-अब-सिर्फ-एक-विषय-में-सुधार-संभव</link>
        <guid>https://statetoday.in/cbse-12वीं-बोर्ड-2026-सप्लीमेंट्री-एग्जाम-में-नियमों-में-बड़ा-बदलाव-अब-सिर्फ-एक-विषय-में-सुधार-संभव</guid>
        <description><![CDATA[ CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE 12th Board Exam New Rule) 12वीं बोर्ड का एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ा अपडेट है। सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड के स्टूडेंट्स के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम (supplementary exam) देने के नियम में बड़ा बदलाव किया है। सीबीएसई का ये फैसला देशभर के लाखों स्टूडेंट्स को प्रभावित करेगा।सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए एक और नियम में बदलाव किया है। पूर्व तक 12वीं का रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स 1 से अधिक सब्जेक्ट में नंबर सुधार के लिए सप्लीमेंट्री यानी इंप्रूवमेंट एग्जाम में शामिल हो सकते थे, ये सप्लीमेंट्री एग्जाम रिजल्ट आने के दो महीने के अंदर आयोजित होता था। इस नियम में सीबीएसई ने बड़ा बदलाव किया है। अब 12वीं बोर्ड के परीक्षार्थियों एक ही सब्जेक्ट में सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकेंगे। यानी सीबीएसई 12वीं बोर्ड के परीक्षार्थियों को अब सिर्फ एक ही सब्जेक्ट के नंबर सुधारने का मौका मिलेगा।1 से अधिक सब्जेक्ट में नंबर सुधार के लिए देनी होगी मेन परीक्षासीबीएसई ने 12वीं बोर्ड के परीक्षार्थियों के लिए नियमों में बदलाव करते हुए जानकारी दी है कि एक से अधिक सब्जेक्ट में नंबर सुधार करने का मौका स्टूडेंट्स को पहले की तरह मिलता रहेगा। सीबीएसई ने कहा है कि 12वीं बोर्ड का एग्जाम देने वाले जिन भी स्टूडेंट्स को एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार करवाने हैं, उन्हें अगले साल आयोजित होने वाली मेन बोर्ड परीक्षा में शामिल होना होगा। यानी एक से अधिक सब्जेक्ट्स में नंबर सुधार करने के लिए स्टूडेंट्स को अगले साल होने वाले मेन एग्जाम में शामिल होना होगा।नियमों में बदलाव का स्टूडेंट्स पर क्या असरसीबीएसई ने 12वीं बोर्ड एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत रिजल्ट के बाद जारी होने के बाद नंबर सुधार के मौकोंं को सीमित कर दिया है। अब स्टूडेंट्स सिर्फ एक ही विषय पर सप्लीमेंट्री एग्जाम दे सकेंगे। ऐसे में स्टूडेंट्स को अपना साल खराब होने से बचाने के लिए बोर्ड एग्जाम के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।15 जुलाई 2026 को सप्लीमेंट्री एग्जामसीबीएसई ने 2026 बोर्ड परीक्षाओं के सप्लीमेंट्री एग्जाम का टेंटिव शेड्यूल भी जारी कर दिया है। सीबीएसई ने कहा है कि 12वीं बोर्ड 2026 के स्टूडेंट्स के लिए सप्लीमेंट्री एग्जाम 15 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। वही सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 में रिजल्ट जारी किया जाएगा। इसके बाद सप्लीमेंट्री एग्जाम के लिए एक सर्कुलर जारी किया जाएगा। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होंगी। ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf7c4464.jpg" length="90481" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>CBSE, 12वीं, बोर्ड, 2026:, सप्लीमेंट्री, एग्जाम, में, नियमों, में, बड़ा, बदलाव, अब, सिर्फ, एक, विषय, में, सुधार, संभव</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>असम कांग्रेस में हलचल: भूपेन बोरा का इस्तीफा और अचानक वापसी</title>
        <link>https://statetoday.in/असम-कांग्रेस-में-हलचल-भूपेन-बोरा-का-इस्तीफा-और-अचानक-वापसी</link>
        <guid>https://statetoday.in/असम-कांग्रेस-में-हलचल-भूपेन-बोरा-का-इस्तीफा-और-अचानक-वापसी</guid>
        <description><![CDATA[ असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार (16 फरवरी 2026) को पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा सौंपने के कुछ घंटों बाद ही इसे वापस भी ले लिया. कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में दावा किया था कि पार्टी नेतृत्व की ओर से नजरअंदाज किया जा रहा है. भूपेन बोरा ने इससे पहले बताया कि उन्होंने सुबह करीब 8 बजे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेजा था. हालांकि, थोड़े बहुत मान मनौव्वल के बाद बोरा ने अपना इस्तीफा वापस भी ले लिया.भूपेन बोरा का पार्टी हाईकमान पर आरोपउन्होंने ने कहा था, ‘मैंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. मैंने अपना इस्तीफा पहले ही केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है. यह फैसला आत्मसम्मान की रक्षा के लिए लिया गया. कांग्रेस के कामकाज के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए भूपेन बोरा ने कहा कि पार्टी आलाकमान संगठन के मामलों पर समय पर और अहम फैसले लेने में नाकाम रहा है. असम में इस साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में भूपेन बोराह के इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी. इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, भंवर जितेंद्र सिंह और प्रद्युत बोरदोलोई, रायजोर डोल प्रमुख अखिल गोगोई के साथ भूपेन बोराह के गुवाहाटी स्थित आवास पर उनके बातचीत करने पहुंचे थे.अचानक क्यों बदला फैसला?असम कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘मैं भूपेन बोरा को अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए धन्यवाद देता हूं. सीनियर कांग्रेस लीडर भूपेन बोरा कांग्रेस परिवार के एक अहम सदस्य हैं. उन्होंने अपना इस्तीफा हमारी पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट को भेजा था. कभी-कभी कांग्रेस परिवार में भी मतभेद हो जाते हैं. कांग्रेस प्रेसिडेंट ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. राहुल गांधी समेत पार्टी लीडरशिप ने उनसे लंबी बातचीत की. हमने बातचीत से इसे सुलझा लिया है. वह पिछले 30 सालों से कांग्रेस में थे.’खास नेताओं का नाम लेने से बचते हुए भूपेन बोरा ने लगातार अंदरूनी मुद्दों और लीडरशिप की कमजोरी की ओर इशारा किया. उनका कहना था कि पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया था. असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि कई मौकों पर चिंता जताने के बावजूद, टॉप लीडरशिप की ओर से कोई मतलब का जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा, ‘यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है. मैंने इसके बारे में ध्यान से सोचा है.’बीजेपी ने भूपेन बोरा को दिया था ऑफरकांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद भूपेन बोरा को बीजेपी ने ऑफर दिया था. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि भूपेन बोरा के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दरवाजे खुले हैं. उन्होंने ये भी कहा कि अगर बोरा बीजेपी में शामिल होते हैं तो वह उन्हें किसी सुरक्षित सीट से चुनाव जितवाने की कोशिश करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बोरा ने अभी तक मुझसे या बीजेपी से संपर्क नहीं किया है और फिलहाल हमारा उनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संपर्क नहीं है.’ ]]></description>
        <enclosure url="http://statetoday.in/uploads/images/202602/image_870x580_69941bf802b2d.jpg" length="72415" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:12:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>statetodaymp@gmail.com</dc:creator>
        <media:keywords>असम, कांग्रेस, में, हलचल:, भूपेन, बोरा, का, इस्तीफा, और, अचानक, वापसी</media:keywords>
    </item>
    </channel>
</rss>